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Sunday, November 25, 2012

हरकीरत हीर जी के काव्य संग्रह " दर्द की महक " और "सरस्वती सुमन" पत्रिका के क्षणिका विशेषांक के लोकार्पण की कुछ झलकियाँ


कल 24 नवम्बर को गुवाहाटी प्रेस क्लब में हरकीरत हीर जी के काव्य संग्रह " दर्द की महक " और उनके ही संपादन में निकली देहरादून से प्रकाशित होने वाली  "सरस्वती सुमन" पत्रिका के क्षणिका विशेषांक  का लोकार्पण हुआ। 


 इस अवसर की कुछ झलकियाँ :-

बाये से- श्री आनंद सुमन सिंह , श्री जी एम श्रीवास्तव जी, श्री किशोर जैन जी, श्रीमती सुधा श्रीवास्तव जी और श्रीमती हरकीरत हीर जी 

सरस्वती सुमन के क्षणिका विशेषांक का विमोचन 

हीर जी द्वारा रचित काव्य संग्रह " दर्द की महक" का विमोचन 



"दर्द की महक" का आवरण पृष्ट 

 "दैनिक पूर्वोदय" में ये खबर 


Sunday, July 15, 2012

सोशल नेटवर्किंग साइट्स की आभासी दुनिया

           आज समाज का कोई भी वर्ग हो, इंटरनेट एक  महत्वपूर्ण जरुरत बन गया है। यह हम सबके लिए आनलाईन लाइब्रेरी और ज्ञान का भंडार है , मनोरंजन के  ढेरो श्रोत उपलब्ध करता है तो वहीँ जीवन की तमाम बेहद जरुरी चीजों जैसे बिजनेस , बैंकिंग, आनलाइन रिजरवेशन इत्यादि को और भी आसान  बना देता है। मगर इस जरुरत के हिसाब से अगर आप इंटरनेट पर समय व्यतीत  आप करते है तो ठीक है लेकिन अगर सिर्फ टाइम पास करने के लिए फेसबुक , आर्कुट , ब्लॉग और ट्विटर जैसी सोशल साईटों  के आदी  बन चुके है तो यह चिंता का विषय है।

            इन दिनों लोग सोशल नेटवर्किंग साईटों खासकर फेसबुक के एडिक्शन का शिकार हो रहे है। शुरू में इस बात का पता नहीं लगता मगर धीरे धीरे आप इसके आगोश में फँसते जाते है और यह आपके समय पर हावी होता जाता है.  इन  सोशल नेटवर्किंग साईटों में  एक दुसरे से बिना किसी परेशानी के सिर्फ एक क्लिक पर आसानी से जुड़ा  जा सकता है , सबको  समझा जा सकता है और सबसे अपने विचारों को शेयर किया जा सकता है. यह एक आभासी मित्रों की दुनिया होती है जहाँ हम  वास्तविक रूप में अपने दोस्तों से बिना मिले भी मिल लेते है।

          फेसबुक इन सोशल नेटवर्किंग साईटों में आज युवा वर्ग की  पहचान बन चुका है। जैसे यह उनके लिए एक स्टेटस सिम्बल बन गया है  ।  मिलने पर हाय हेलो की जगह पहले फेसबुक आईडी ही पूछा जाने लगा है। ऐसा लगता है की आज जो फेसबुक पर नहीं है उसके लिए अपने दोस्तों के बीच एक हीन  भावना बन  गयी है। आज फेसबुक हमारे समाज में कई तरह के परेशानियों का सबब भी ले कर आ रहा है।

          फेसबुक का सबसे पहला प्रभाव ये पड़ रहा की हमारे आभासी फ्रेंड लिस्ट में जहाँ दोस्तों की संख्या  दिन दुनी रात  चौगनी बढती जा रही है वहीँ वास्तविक दोस्तों की संख्या तेजी से घटती जा रही है। जो शाम  हम अपने दोस्तों के बीच मस्ती से कभी बिताया करते थे वह समय अब फेसबुक दोस्तों के लिए चला जा रहा है। दोस्त से वास्तविक मुलाकात हुए भले ही महीने बीत चुके हो मगर फेसबुक पर वह रोज मिल जाता है।हमारी तरह वो भी अपने आनलाईन दोस्तों की संख्या में इजाफा करने में लगा रहता है। अगर कहा जाय  की यह दोस्तों का दुश्मन है तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।

         जहाँ तक मेरा मानना  है इस इन सोशल नेटवर्किंग साईटों की आदत किसी और नशे जैसे  शराब , सिगरेट , गुटके जैसी ही होती है जो न मिले तो बेचैन कर देती है। आज अगर एक सप्ताह नेट ख़राब हो जाय  या किसी अन्य कारण  से से नेट से दूर रहना पड़ जाये तो काफी अकेलापन लगने लगता है . जैसे लगता है की दुनिया से संपर्क हुए वर्षों बीत गए हो। यह धीरे धीरे हमें  अपने नशे का शिकार बना लेता है और इससे दूर होना हमें खलने लगता है। चिडचिडापन आने लगता है और लोगों में फील गुड फील बैद बन जाता है।

          सोशल नेटवर्किंग साईट्स एक खुली किताब की तरह होती है, जहाँ  लोग अपनी पर्शनल बातें जो  किसी से शेयर नहीं कर पाते या कहने में संकोच  करते है , उसे यहाँ  बिना किसी परेशानी के शेयर करते है  ।   अपने पद , प्रतिष्ठा और स्टेटस सिम्बल का लोग खुलकर  बखान करते है अतः इससे जो फेसबुक यूजर्स उस स्टेटस को नहीं पा सकते उनमें हीन  भावना आने लगी है। किसी फ्रेंड  के फ्रेंड लिस्ट में दोस्तों की अधिक संख्या भी  फेसबुक यूजर्स में हीन भावना भरती है की कैसे  मेरे दोस्तों की संख्या कम है और क्यों नहीं बढ़ रही  है। इसके लिए लोग ज्यादा से ज्यादा नेट  पर देने  लगते है  ।   लोगों में होड़ लग जाती है कितने ज्यादा मैटर और फोटो नेट से सर्च करके स्टेटस अपडेट किया जाय ।
       
           इसके  अलावा इन साईट्स पर स्टेटस अपडेट , कमेन्ट और  लाईक को सफलता की कुंजी मान जाता है। जिसे जितने कमेन्ट और लाईक मिले वह उतना ही बड़ा बन जाता है। इससे जो इस साईट्स पर नए है और जिन्हें पर्याप्त कमेन्ट और लाईक नहीं मिल पाते उनमें भी हीन  भावना घर कर लेती है। वैसे इन कमेन्ट और  लाईक   की हकीकत ये होती है की आप जितना देंगे उतना ही आपको बदले में मिलने की सम्भावना ज्यादा रहती है . मगर इसके लिए समय चाहिए जो हर किसी के पास बराबर नहीं।

            इनकी वजह से लोग बेहद जरुरी काम  भी  जल्दी जल्दी निपटा लेते है। लोग घर- परिवार के लिए पहले जितना टाईम  नहीं दे पाते ।   इस चक्कर में कुछ जरुरी काम छूट  भी जाते है। जो समय लोग  नेट पर फालतू में नष्ट कर दे रहे है उन्हें अगर बच्चों के साथ बिताये और घर परिवार के बारे में सोंचे तो ज्यादा बेहतर होगा।
 
            यह लोंगों की  रचनात्मकता को भी ख़त्म करती जा रही है। ज्यादा कमेन्ट और लाईक  के चक्कर में लोग बिना सोंचे समझे दूसरों की प्रोफाईल पर जाकर कमेन्ट और लाईक की झड़ी लगा देते है। क्योंकि अगर ऐसा नहीं करेंगें तो उनके प्रोफाईल के स्टेटस  पर सूखा ही सूखा पड़ा रहेगा। ऐसे में लोग अपनी रचनात्मक सोंच को छोड़ चापलूसी वाले अंदाज में आ जाते है और जो जितना ज्यादा भ्रमर कर लेता है उनके यहाँ उतने ही भँवरे दस्तक दे जाते है।ऐसे में ये बिना सोंचे समझे लाईक  और कमेन्ट का खेल और ज्यादा से ज्यादा दोस्त बनाने की उत्सुकता  अपनी रचनात्मकता  के हिसाब से अच्छा संकेत नहीं है।

            इन सबके अतिरिक्त इंटरनेट पर  ज्यादा समय बिताना खुद की सेहत के साथ भी खिलवाड़ है। ऐसे लोंगों में नींद पूरी न होने की शिकायत रहती है। रात  में नींद पूरी न होने से पूरे  दिन आफिस और काम  की जगह लोग थके थके से पाए जाते है ।  कमर, गर्दन और हथेलियों का दर्द आम बात बनती जा रही है. आँखों पर असमय ही चश्में आने लगे है।

           अगर आपको भी लगता है की इन  सोशल नेटवर्किंग साईटों  पर समय व्यतीत करते हुए आपको भी इन बातों  का आभास हुआ है  तो अब सम्हालने की बारी आ गयी है। सबसे पहली बात की इनके लिए एक समय निर्धारित करें की बस उसी निश्चित  समय में ही फेस्बुकाई , ब्लागिरी  ट्विटरई  और आरकुटाई  करना है। बाकि समय आपके जरुरी काम - धन्धों   और घर परिवार के लिए रहे। इन सबसे जरुरी की आपके अनुपस्थिति में आपके बच्चे नेट पर क्या कर रहे है इसका लेखा जोखा आपको चुपके चुपके  रखना चाहिए। जरुरत के लिए तो लोग अपने बच्चों को पढाई का हवाला देकर इंटरनेट दिला देते है , अच्छी बात है , मगर फेसबुक और इन साईटों  दे दूर रखना भी पैरेन्ट  की ही जिम्मेदारी है। इसके अलावा कभी कभी बच्चे उत्सुकतावश या अनजाने में गलत साईट  खोल बैठते है और बाद में उसके आदी हो जाते है।

            वास्तविक दोस्तों के बीच  समय बिताना , बातें शेयर करना और एक दुसरे की समस्यायों   को जानना बेहद जरुरी है। वर्चुअल और हकीकत की दुनिया का अंतर समझाना ही सही रहेगा । दूसरों के स्टेटस पर लाईक और कमेन्ट देख अपना  माथा न खुजलाये।   जरुरी कामों को पहले निपटाये । अपने हर मिनट मिनट का हिसाब अपडेट  न करें और अपनी कुछ खाश  नीजी बातों को पब्लिकली शेयर न करें तो अच्छा रहेगा ।   कभी कभी आपकी इन नीजी बातों  और फोटो को गलत प्रयोग भी लोग कर लेते है। सोशल नेटवर्किंग साइट्स  की इस आभासी दुनिया के आदी  न बने और जरुरत के हिसाब से इंटरनेट को प्राथमिकता  दें और कम से कम सप्ताह में एक दिन ऐसा चुने जो आपका , आपके परिवार का और आपके वास्तविक दुनिया का हो और इन्टरनेट को एक दिन आराम दे।

Wednesday, July 4, 2012

इंटरनेट और सोशल नेटवर्किंग की भाषा

              एक जमाना था की जब लोग लम्बे लम्बे ख़त लिख कर अपनी भावनाओं का इजहार करते थे  और अगले के पास भी इतना समय था की वह इन्हें पढ़ सके . पत्र लिखना भी एक कला  माना  जाता था और लोग अपनी  भावनाओं को उत्कृष्ट शब्दों के माध्यम से दिलों में जगह बनाया करते थे . प्रेमिका अपने प्रेमी के ख़त को बार बार पढ़कर खुश  करती थी।. आज  इंटरनेट की रफ़्तार पर सरपट भागती और बेहद  व्यस्त भाग- दौड़ की जिंदगी  में अब न तो किसी के पास इतना समय रहा लिखने को और न ही किसी के पास पढने  का।

             इंटरनेट और सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने जिंदगी के मायने बदल दिए है और भावनाओं का इजहार  का  अब बड़े बड़े ख़त नहीं बल्कि अंग्रेजी के छोटे छोटे कुछ  शब्दों ने सम्हाल लिया है . ख़त अब लुप्त प्राय हो रहे है और हो  सकता  है कुछ  दिनों में  सिर्फ देखने की चीज बनकर रह जाये।  ख़त किसी भी पते पर पहुँचने के लिए 10 दिन लग जाते थे मगर अब 10 सेकेंड की  क्लिक पर आपका सन्देश अपनी जगह पहुँच रहा है।. देश तो छोडिये लन्दन, न्यूयार्क और मास्को जैसे शहर भी चंद सेकेण्ड की  क्लिक  पर हाजिर है।.

             समय परिवर्तन लेकर आता है और उसके साथ साथ हर चीज बदलती है . जिंदगी के जीने और   भावनाओं के इजहार का तरीका  भी अछूता नहीं रहा . मन के भावों को व्यक्त करने के लिए जरुरी नहीं  की अब बड़े और लम्बे वाक्य प्रयोग में लाये जाये. भाषा के साहित्यिक पक्ष को धता बताते  हुए इंटरनेट और चैटिंग  की इस भाषा ने अपने लिए  कुछ नए मापदंड तय   किये ।. यह  भाषा किसी एक भाषा की नहीं बल्कि हिंदी और इंग्लिश के गठजोड़ से उपजी कम शब्दों में बड़ी बात कह जाने वाली भाषा है।.  इसके लिए व्याकरण  और साहित्य शास्त्र  के नियम फेल है।.

            इंटरनेट और चैटिंग की भाषा आसानी से अपनी बात कहने का "सबसे तेज " तरीका है . यह  सिर्फ चंद शब्दों और चंद  संकेतों में अपनी पूरी  बात को कह जाती है।. यह भाग-दौड़ की  व्यस्त जिंदगी  में तेजी से आगे बढती हुई भाषा  है. यह एक दोतरफा माध्यम है क्योंकि  ख़त  पढ़ते वक्त ख़त लिखने वाला सामने नहीं रहता जबकि  चैटिंग के समय आपका पार्टनर आपके साथ पल--पल रहता है और कुछ क्षणों में ही आपको जबाब मिल जाता है और आपको भी उतने  ही समय में  जबाब देने की मज़बूरी होती   है  ।.

          मोबाईल और इन्टरनेट के ज़माने की इस भाषा के पीछे लम्बे और बड़े शब्दों को टाईप करने से मुक्ति पाने की कोशिश भी रही होगी . मोबाईल पर इन्हें टाईप करने में समय भी बहुत लगता है . यह भाषा आवश्यकता के अनुसार बदलती रही है। कुछ  शब्द और संकेत इस प्रकार है :-

       
AFAIK -- As Far As I Know
AFC -- Away From Computer
ASAP -- As Soon As Possible
BAS -- Big A** Smile
BBL -- Be Back Later
BBN -- Bye Bye Now
BBS -- Be Back Soon
BF -- Boyfriend
BRB -- Be Right Back
BTW -- By The Way
BWL -- Bursting With Laughter
CID -- Crying In Disgrace
CRBT -- Crying Real Big Tears
CYA -- See You (Seeya)
CYAL8R -- See You Later (Seeyalata)
DLTBBB -- Don't Let The Bed Bugs Bite
EMSG -- Email Message
FC -- Fingers Crossed
FTBOMH -- From The Bottom Of My Heart
FYI -- For Your Information
GAL -- Get A Life
GF -- Girlfriend
GFN -- Gone For Now
GTSY -- Glad To See You
H&K -- Hug and Kiss
HABD -- Have A Better DAY
HAGN -- Have A Good Night
HHIS -- Hanging Head in Shame
IAE -- In Any Event
IC -- I See
IMO -- In My Opinion
IOW -- In Other Words
IRL -- In Real Life
IWALU -- I Will Always Love You
JTLYK -- Just To Let You Know
KIT -- Keep In Touch
KOC -- Kiss On Cheek
KOL -- Kiss On Lips
LHO -- Laughing Head Off
LHU -- Lord Help Us
LMAO -- Laughing My A$$ Off
LMSO -- Laughing My Socks Off
LOL -- Laugh Out Loud
LTNS -- Long Time No See
LUWAMH -- Love You With All My Heart
OIC -- Oh, I See
OL -- Old Lady
OM -- Old Man
OTOH -- On The Other Hand
PM -- Private Message
PMFJI -- Pardon Me For Jumping In
QSL -- Reply
QSO -- Conversation
QT -- Cutie
ROFL -- Rolling On Floor Laughing
SETE -- Smiling Ear To Ear
SOTMG -- Short Of Time Must Go
SWAK -- Sealed With A Kiss
SWL -- Screaming with Laughter
SYS -- See You Soon
TA -- Thanks Again
TCOY -- Take Care Of Yourself
TNT -- Till Next Time
TOY -- Thinking Of You
TTFN -- Ta Ta For Now
TTYL -- Talk To You Later
WB -- Welcome Back
YBS -- You'll Be Sorry
YG -- Young Gentleman
YL -- Young Lady
YM -- Young Man

Some Symbols:-

:-| -- Ambivalent 
o:-) -- Angelic
>:-( -- Angry
|-I -- Asleep
(::()::) -- Bandaid
:-{} -- Blowing a Kiss
\-o -- Bored
:-c -- Bummed Out
|C| -- Can of Coke
|P| -- Can of Pepsi
:( ) -- Can't Stop Talking
:*) -- Clowning
:' -- Crying
:'-) -- Crying with Joy
:'-( -- Crying Sadly
:-9 -- Delicious, Yummy
:-> -- Devilish
;-> -- Devilish Wink
:P -- Disgusted (sticking out tongue)
:*) -- Drunk
:-6 -- Exhausted, Wiped Out
:( -- Frown
\~/ -- Full Glass
\_/ -- Glass (drink)
^5 -- High Five
(( )):** -- Hugs and Kisses
:-I -- Indifferent
:-# -- Lips are Sealed
:~/ -- Mixed Up
:-O -- Mouth Open (Surprised)
**** -- Popcorn
<<{:}} -- Ice cream
:-@ -- Screaming
:-O -- Shocked
:-) -- Smile
^ -- Thumbs Up
:-& -- Tongue Tied
:-\ -- Undecided
;-) -- Wink
|-O -- Yawning
c[T] -- cup of tea
c[C] -- cup of coffee
(%> -- pizza
,,l, -- the finger
 >^-^< -- cats
 (_\_)(_|_)(_/_) -- dancing ass off
:-------) -- Viagra smile


Saturday, June 16, 2012

फेसबुक : जरा संभल के

"फेसबुक : जरा संभल के "

       
      सूचना और क्रांति  के क्षेत्र में आई नयी क्रांति ने देशों की सीमाओं को गौण सा कर दिया है  । पूरा विश्व अब एक विश्व - ग्राम की शक्ल में बदलता जा रहा है । सुदूर गाँव में बैठा मटरू अब मोहनलाल बन न्यूयार्क की स्वेतलाना के संग चैटिंग की हसीन वादियों में विचरण करने लगता है तो अगले ही पल मेलबोर्न की मारिया के संग कम्प्यूटर की की- बोर्ड पर अंगुलियाँ खेलने लगती है। उसकी एक क्लिक पर कभी लन्दन की मेम हाजिर हो जाती है तो अगले पल जापानी हसीन छोरी चैट  के लिए आन लाइन हो जाती है।

               जैसे - जैसे कम्प्यूटर का जाल फैलाना शुरू हुआ और इंटरनेट का विकास हुआ , फेसबुक , आर्कुट, गूगल प्लस जैसे सोशल साईट्स से लोंगों का परिचय हुआ । इसमे फेसबुक ने बहुत ही कम समय में अपार लोकप्रियता हासिल की । इसकी शुरुआत 2004 में अमेरिका के कैलिफोर्निया शहर में मार्क जुकरबर्ग ने की । कुछ ही समय में मार्क जुकरबर्ग देखते ही देखते दुनिया के ख्यातिप्राप्त व्यक्तियों में शामिल हो नये। सोशलबेकर   नमक एक वेब साईट के अनुसार दुनिया भर में करीब 75 करोड़  के आस - पास फेसबुक यूजर्स है जिसमें अमेरिका  करीब 15 करोड़ के साथ पहले, ब्राजील  4 करोड़ 80 लाख के साथ दुसरे और भारत 4 करोड़ 63 लाख के साथ तीसरे स्थान पर है।








                फेसबुक की इसी लोकप्रियता का फायदा उठाकर कुछ ठ
गों ने फर्जी प्रोफाईल बनाकर सर्वे और चैरिटी के जरिये लोंगों को ठगने का काम शुरू कर दिया है । अभी कुछ ही दिन पहले ज्यादातर लोग एक खास लिंक " हु ब्लाक्ड  यु फ्रॉम हिज प्रोफाईल " , जो ज्यादातर हर प्रोफाईल में दिख जाता था ,के शिकार हुए।  यह लिंक दावा करता था कि किस दोस्त ने आपको अपनी फ्रेंड लिस्ट से बाहर कर दिया है इसका पता आप इस लिंक के जरिये लगा सकते है। जैसे- जैसे लोग इस लिंक के जाल में फँसते गए ,उनसे कुछ निजी जानकारियाँ भी इस प्रोसेस में माँगी गयी। इसमें ज्यादा दिलचस्पी दिखाने वालों को मोबाईल नम्बर, पेन कार्ड नम्बर, क्रेडिट कार्ड/ डेबिट कार्ड और अकाउंट नम्बर तक इस प्रोसेस में देने थे । इस जानकारी के आधार पर शातिर ठग कईयों के पैसे उड़ा  लिये. आजकल ये लिंक फेसबुक से गायब हो चुका है ।

                 ये ठग आनलाइन सर्वे के जरिये भी शामिल होने वालों फेसबुक यूजर्स को लुभावने गिफ्ट, ईनाम आदि का वादा करके पैसों कि माँग करते है और कुछ दिनों बाद चुपके से अकाउंट  बंद कर चंपत हो लेते है । ये ठग लोगों कि भावनाओं के साथ खेल कर उन्हें भुनाने में भी पीछे नहीं रहते है । जापान में आये भूकंप की तबाही और विनाश कि ख़बरों ने दुनिया भर को विचलित कर दिया । दुनिया भर के तमाम लोग इन भूकंप पीड़ितों कि मदद के लिए सामने आने लगे । ठगों ने चैरिटी के लिए अलग-अलग जगह कई अकाउंट  बनाकर लोगों से चैरिटी के नाम पर दान देने की अपील की और  कुछ ही दिन बाद ये ठग सारे रूपये लेकर गायब हो गए ।

                 ये ठग भी नित नए - नए तरीके खोजते रहते है । कुछ दिनों पहले ब्रिटेन में ठगों ने प्रिंस हैरी के नाम पर एक फर्जी प्रोफाईल बनाई और फ्रेंडशिप के जरिये लाखों लोंगों को मित्र बनाया। जब लोगों को विश्वास हो गया तो उन्होंने इस कड़ी में प्रिंसेस डायना के नाम पर एक चैरिटी संगठन बनाकर इन सदस्यों से समाज सेवा के नाम पर दान देने की अपील की । इसमें कई लोग ठगी के शिकार बने जिनमे प्रिंस हैरी पर न्यौछावर होने वाली महिलायें ज्यादा थी ।
              हालंकि फेसबुक पर ठगी के शिकार ज्यादातर लोग विदेशों में ही हुये है क्योंकि भारत में  फेसबुक यूजर्स कम है और ये फेसबुक अभी-अभी परवान चढ़ना शुरू हुआ है । फिर भी सतर्क रहने की जरुरत है । हमारे देश में भी कई प्रसिद्ध व्यक्तियों के फर्जी प्रोफाईल सामने आये है । इस फर्जी प्रोफईलों के लिये लोग खींचे चले आते है । अतः किसी बड़े हीरो - हिरोईन या किसी अन्य लोकप्रिय व्यक्ति के नाम से फ्रेंड रिक्वेस्ट आये तो ज्यादा खुश होने के बजाय सतर्क होने की जरुरत है । इसके अलावा किसी भी चैरिटी और सर्वे का हिस्सा बनाए पहले से पहले दस बार सोंचना चाहिए और जहा पैसे का खेल शुरू हो या पैसे की माँग हो तुरंत वही से वापस मुड़ जाना चाहिए ।
              आये दिन हमारी प्रोफाईल में रोज नये- नये नाम धड़ल्ले से जुड़ते जा रहे है ।दोस्तों की संख्या बढ़ाने और दुसरे से आगे निकलने की होड़ में हममे से कोई भी इस बात की जहमत नहीं उठता की इसमें से कौन सही और कौन गलत है । ये ठग कभी भी आपके ही प्रोफाईल से आपके दोस्त के फोटो और जानकारी लेकर एक नयी प्रोफाईल के साथ आपमें जुड़ जायेंगे और चैटिंग के जरिये आपसे निजी जानकारी जैसे बैंक अकाउंट या क्रेडिट कार्ड नम्बर अगर प्राप्त कर सके तो  आपके अकाउंट पर आन लाइन खतरा आ सकता है । ये ठग हैकरों के मदद से आपके प्रोफाईल से ही कुछ जानकारियाँ जैसे जन्मदिन और फ़ोन नंबर लेकर आपके बैंक अकाउंट या क्रेडिट कार्ड नम्बर पता कर सकने में सक्षम है। इसलिए निजी जानकारियाँ फेसबुक पर  बिलकुल ही नहीं शेयर करनी चाहिए । 

            इन ठगों के ऊपर कार्यवाही करना बहुत मुश्किल होता है क्योंकि पकड़ में आने से पहले ही ये अपने नकली अकाउंट  बंद करके फरार हो चुके होते है । अपनी समझदारी ही इनसे बचने का सरल उपाय है । फेसबुक पर आप किसी भी सर्वे या प्रतियोगिता में आप हिस्सा न ले और अगर इसके लिये  आपसे पैसे जमा करने के लिये अकाउंट और क्रेडिट कार्ड नंबर माँगा जाय तब तो बिल्कुल ही नहीं । किसी चैरिटी और सामाजिक कार्य के लिये दान देने का आन लाइन तरीका तो बिल्कुल ही न अपनायें तथा अपने मोबाईल नंबर और निजी जानकारियाँ फेसबुक पर किसी अंजान को कभी न दें । 

          आज मानों फेसबुक ने एक सामाजिक क्रांति सी ला दी है । जिसका फेसबुक अकाउंट नहीं है वह जल्द से जल्द मानों  जुड़ जाना चाहता है । नए दोस्त बनाने से पहले लोग उसका फेसबुक अकाउंट पूछना नहीं भूलते । लोगों ने अपनों तथा अपने दोस्तों का एक फ्रेंड- सर्किल बना लिया है तथा बिना किसी खर्च के अपने विचार अपने दोस्तों के बीच शेयर करने लगे है । सामाजिक रिश्ते ज्यादा खुलेपन के साथ सामने आने लगे है । जो बात लोग सामने कहने से हिचकते है अब उन्हें शेयर करने की आजादी मिल गयी है । लोग पुराने तथा बिछुड़े मित्रो को भी यहाँ  सर्च करने लगे है. जैसे पूरी दुनिया लगता है एक छोटे से लैपटाप में समा गयी है ।
   
             मगर जैसे जैसे फेसबुक लोकप्रिय होता जा रहा है इसके कई नकारात्मक सामाजिक प्रभाव भी सामने आने लगे है ।  एक हद तक तो फेसबुकिया प्यार ठीक है मगर  जब हद से ज्यादा फेसबुक प्रिय लगने लगे तो दुष्परिणाम तो सामने आने ही है । वास्तविक  मित्रता और हकीकत की दोस्ती से ज्यादा लोग आन लाइन और आभासी मित्रता को ज्यादा महत्व देने लगे है । अब लोग फेसबुक के जरिये आन लाइन दोस्त बनाने में ज्यादा व्यस्त है । फेसबुक दोस्तों की संख्या जहाँ   बढती जा रही वहीं पारिवारिक तथा वास्तविक दोस्त सिमटते जा रहे है । 
             फेसबुक दोस्तों को अपने बारे में अपडेट करने में जो लोग घंटों दिलचस्पी दिखाते है जबकि  उनके लिए अपने पारिवारिक  दोस्तों के लिए समय निकलना मुश्किल होता जा रहा है । इसके अतिरिक्त घर- परिवार के अन्य जरुरी काम भी इस चक्कर में गौण होने लगे है। फेसबुक पर जो समय लोग बर्बाद करते  है वो समय परिवार के लिए काफी महत्वपूर्ण हो सकते है। फेसबुक ने कई परिवारों को विघटन के कगार पर ला दिया है । 
           इसके अतिरिक्त फेसबुकिया दोस्त भावनात्मक स्तर पर नहीं जुड़ पाते है। जब तक वो आपसे लाईक और कमेन्ट पाते रहते है तब तक तो रिस्पांस देते रहते है अन्यथा आप सिर्फ उनके लिए फ्रेंड लिस्ट की एक संख्या भर रह जाते है। यह दोस्ती वास्तविक दोस्ती के मुकाबले काफी दुर्बल होती है । यह कभी भी और किसी भी पल हमेशा के लिए टूट सकती है।  इसलिए जो लोग भावनात्मक स्तर पर इनसे गहरे जुड़ जाते है कभी- कभी उन्हें काफी मानसिक कष्ट भी होता है जो उनकी परेशानी का सबब भी बन जाता  है। अभी हाल में ही हैकरों ने अश्लील  विडिओ और फोटो बहुतों के  वाल पर पोस्ट करके सनसनी फैला दी थी. 

              स्कुल और कालेजों के विद्यार्थी अपना बहुत सारा कीमती समय फेसबुक पर बिताने लगे है जिससे वो पढाई पर कम ध्यान दे पा रहे  है।  उनमे नए दोस्त बनाने की होड़ सी लग गयी है तथा पढ़ाई की जगह बातचीत का क्षेत्र फेसबुक के इर्दगिर्द घुमने लगा है। इसके आलावा अपने पसंदीदा महिला मित्र के कहीं मुख मोड़ने या किसी अन्य के साथ रिश्ते में बंधने पर कुछ दुष्ट प्रवृति के लोग उसके नए ब्वायफ्रेंड  के प्रोफाइल पर जाकर उक्त महिला के बारे गलत जानकारी और आलतू- फालतू बातें रिश्ते तोड़ने के लिए मेसेज कर देते है। एक ताजा घटना क्रम में एक मामला प्रकाश में आया जिसमे लड़की का मित्र उसके शादी के बंधन  में बंधने से खुश नहीं था इसलिए उसने लड़की के होने वाले पति और उनके सम्बन्धियों के  प्रोफाईल पर जाकर लड़की के बारे कई झूठी और गन्दी बाते शेयर की । वह लड़का अलग अलग आईडी से बार बार मेसेज कर रहा था । वो तो भला हो जो पुलिस के बीच में आने और दोनों पक्षों की समझदारी से यह रिश्ता बचा।

           इतना ही नहीं कुछ बदमाश लड़के नकली नाम से प्रोफाईल बनाकर अपनी ही क्लास की लड़की  से दोस्ती कर बाद में तंग करने लग जाते है। इसके अतिरिक्त फेसबुक राष्ट्र - विरोधी कार्यों में लगे लोगों के लिए एक नये हथियार के रूप में सामने आया है। इसके माध्यम से ये आसानी से सन्देश तथा जरुरी बातें अपनों तक पहुंचाकर अपनी प्रोफाईल डिलीट कर देते है। प्राईवेसी   लगी होने से इनके अकाउंट की अन्य जानकारियाँ   सबको नहीं दिख पाती और ये आसानी से चुपके -चुपके अपने काम करते रहते है। 

                  अतः जहाँ फेसबुक एक तरफ सामाजिक क्रांति के रूप में देखा जा रहा है तो दूसरी तरफ इसके दुष्परिणाम  भी कम नहीं है।  जरुरत है समझदारी से काम लेने की.  फेसबुक दोस्तों के साथ भावनात्मक स्तर पर ज्यादा न जुड़े और समय की बर्बादी कम से कम करें। इसकी जगह पारिवारिक  तथा अन्य सामाजिक चीजों को ज्यादा तरजीब दें. इसके अतिरिक्त पैसे का लेन- देन बिलकुल न करें।



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( * data source- http://www.socialbakers.com/facebook-statistics/  )

Monday, March 5, 2012

क्या सिलेंडर भी एक्सपायर होते है ?

             क्या सिलेंडर भी एक्सपायर होते है ? रसोई गैस (LPG ) के  सिलेंडर ( physical life) की भी एक एक्सपाईरी डेट होती है . एक्सपाईरी सिलेंडर प्रयोग  में लाना सुरक्षा की दृष्टि से बहुत ही घातक होता है तथा ये कई दुर्धटनाओं को आमंत्रित करता है . इसलिए जब भी आप  सिलेंडर वाले से सिलेंडर ले तो उसके एक्सपाईरी डेट की जाँच करना न भूले.       

              किसी भी सिलेंडर की  एक्सपाईरी डेट को जानना बहुत ही आसान होता है. यह सिलेंडर के उपरी हिस्से के एक पट्टी पर पेंट करके लिखा होता है . इसमे अंग्रेजी के एक वर्ण  के साथ गिनती की संख्या में दो अंक लिखे होते है .

अंग्रेजी का वर्ण एक्सपाईरी डेट के साल की  तिमाही ( Quarter) को दर्शाता है:-  

'A'  stand  for First Qtr ( Jan- Mar)
'B'  stand  for Second Qtr ( Apr- Jun)
'C' stand  for Third Qtr ( Jul- Sep)
'D' stand for Forth Qtr ( Oct- Dec)

और इसके साथ लिखा अंक एक्सपाईरी डेट के साल को दर्शाता है,  जैसे 19 का अर्थ होता है 2019.

उदहारण के लिए जिस सिलेंडर पर D -19 लिखा है  वह सिलेंडर दिसंबर 2019 के  महीने में एक्सपायर हो जायेगा और जिस सिलेंडर पर C- 20 लिखा है वह सिलेंडर सितम्बर 2020 में एक्सपायर हो जायेगा.

                                        

यहाँ यह ध्यान देना आवश्यक है की यह तारीख गैस सिलेंडर में भरी गयी गैस के एक्सपाईरी डेट को नहीं दर्शाती बल्कि लोहे के सिलेंडर की एक्सपाईरी डेट को दर्शाती  है. एक्सपाईरी सिलेंडर कभी भी फट सकता है क्योंकि इसका लोहा घिस चुका होता है और  पतला एवं कमजोर हो गया होता है. इसके अलावा अगर सिलेंडर की बाहरी दशा ठीक नहीं लग रही हो तो उसे भी लेना सही नहीं है. ऐसे सिलेंडर को प्रयोग करना  घर में कभी भी सुरक्षित नहीं है. ऐसे सिलेंडर कभी भी जानलेवा साबित हो सकते है इसलिए अधिक से अधिक लोंगों को इस बारे में कृपया शिक्षित करने का प्रयास करें.

Tuesday, February 7, 2012

बड़ा गड़बड़झाला है

बड़ा गड़बड़झाला है.......एक छोटा सा उदहारण लीजिये की अगर किसी टेलीकाम कंपनी के पास एक छोटी सी एरिया में अगर 2 लाख कस्टमर है और अगर वह बिना बताये इन सभी नम्बरों पर कोई सर्विस  एक्टिवेट करके Rs-3/- काट ले, तो एक दिन में 6 लाख  रुपये इनके हुए. अगर एक लाख ने भी इसे संज्ञान में लेते हुए कम्पलेन की तो उनके तो ये पैसे वापस कर देते है ( वो भी काफी पापड़ बेलने के बाद,  उसपर से सीनाजोरी भी की आपने ही हमारे मेसेज को रिस्पोंस देकर एक्टिवेट कराया है ) और आधे  जिनको पता नहीं चला उनके बाकि के 3 लाख तो इन कंपनियों के जेब में पूरी तरह से हवाले हो गये सिर्फ एक छोटी से एरिया से वह भी पलक झपकते कुछ ही मिनटों में.  इसके अलावा बहुत से लोगों और दूर गाँव देहात के अनपढ़ और मजदूर लोंगों को तो पता ही नहीं चल पाता की पैसे कट गए है. 

ये कितने ढीठ है की अपनी गलती  कभी मानते भी नहीं और समस्या  भी ख़त्म करने में कोई दिलचस्पी नहीं लेते. जैसे कि पिछले 2 महीनों की मेरे और एयरटेल के बीच की इस रस्साकस्सी से समझा जा सकता है. .......

MY FIRST MAIL:-

From: upen1100@yahoo.com
To: nodalofficer@airtel.in
Cc: 121@in.airtel.com
Sent: 06/12/2011 09:05:36 PM
Subject: Activation of Services without my Request
 

Dear sir,
1.        I am Upendra Nath having a Pre-paid connection  with mob no. 8011218793  . My ibid mobile no. get activated ' cricket score alert' on 05/12/11 without my request and knowledge. your Customer care ( on 05/12 ref no.-CBDCK21205607386) saying that it activated by making a call around 03.55 pm on 05/12 , But I am sure, i have have not requested for any such services. This type of service was also deactivated by me on  14/11, 16/11 ,which activated at your end without my request.
2.       Earlier some others services were also activated. After so many complain and contacting your customer care, this type of service is activating repetitively. After DND service activated , this type of happening is forcing me to change this mob no. or adopt a option of Mobile Number Portability.  Last time customer care told that this will not activate in future but again its activated. Except incoming and outgoing call, i want all services should be stopped immediately.
 3.       I am requesting you to look in to the matter and do needful for not activating this type of service in future.

                                                                                                                      Thanking you,
                                                                                                   
                                                                                                                     ( Upendra Nath)
REPLY BY AIRTEL:-
From: "nodalofficer@airtel.in"
To: upen1100@yahoo.com
Sent: Wednesday, 7 December 2011 5:10 PM
Subject: Re: ACTIVATION OF SERVICES WITHOUT MY REQUEST
[|BAL|Qrc10612112112556917164|]

Dear Mr. Nath,
Warm greetings from all of us at airtel.
This is in reference to the email received on 06 December 2011, expressing concern regarding the VAS (value added service) service deactivation for your airtel mobile number 8011218793. 
We understand your problem and sincerely apologize for the inconvenience caused to you. Assuring you the best of our services. Warm Regards Kavita Kavita Nodal Office Bharti Airtel Limited 

MY SECOND MAIL:-
From: Upendra Nath
To: "nodalofficer@airtel.in"
Cc: "appellate.nesa@airtel.in"
Sent: Tuesday, 13 December 2011 9:00 PM
Subject: Re: ACTIVATION OF SERVICES WITHOUT MY REQUEST
[|BAL|Qrc10612112112556917164|]


Dear sir,
The Vas activation again took place on 10/12 for "cricket score alert " . Its happening without my knowledge and lead to amount deduction. you are again requested to do the needful for the below mentioned problems, still persist. 


thanking you. 



REPLY BY AIRTEL:-


From: "Nodalofficer.NESA@in.airtel.com"
To: Upendra Nath
Sent: Wednesday, 14 December 2011 10:20 AM
Subject: Re: Activation of Services without my Request 8011218793
Dear Sir
Thank you for writing to Airtel.

This is with reference to your mail regarding Vas activation in your Airtel number  8011218793.

It has always been our effort to provide you with supreme and unrivaled customer service. We truly believe that our accomplishments lie in meeting your requirements.

As per your request, we would like to inform you that All the Vas service (Cricket pack) has been deactivated on 13/12/11 from your Airtel number.
I truly hope that the above details adequately address your query.  Assuring you the best of our services

Warm Regards,
Nodal Officer
Assam & North East

MY THIRD MAIL:-

From: upen1100@yahoo.com
To: appellate@airtel.in
Cc: nodalofficer@airtel.in
Sent: 18/12/2011 10:08:46 PM
Subject: Re: ACTIVATION OF SERVICES WITHOUT MY REQUEST

Dear sir,
Cricket score alert is again activated on my no. 8011218793. Firstly, please stop this service immediately and refund my deducted amount back. Secondly,  just tell me can i get a rid of this problem  in future or not ? why cant you able to stop VAS (value added service) activation  to my number after so many repeated complains ?  can you justify reason behind this ? I think its not good that every time i call your customer care and register a complain and get my deducted amount back.

This is forth time when my mobile got activated with some service without my request and my knowledge. I am having this mobile since last two year but never get this type of problems. Since last two months i m facing lots of problems. Please read your reply forwarded to me for my bellow mentioned e-mail . If you are not able to ensure me then I am insuring you if this type of nonsense will not stop in future, i have no hesitation to change this number as well as service provider.


REPLY BY AIRTEL:-
From: "appellate@airtel.in"
To: upen1100@yahoo.com
Sent: Wednesday, 21 December 2011 5:40 PM
Subject: Re: ACTIVATION OF SERVICES WITHOUT MY REQUEST [|BAL|Qrc11812112212077083892|]
Dear Mr. Nath,
Warm greetings from all of us at airtel.
This is in reference to the email received on 18 December 2011, expressing concern regarding the VAS (value added service) service deactivation for your airtel mobile number 8011218793. 

We understand your problem and sincerely apologize for the inconvenience caused to you.
Assuring you the best of our services.

Warm Regards
Anshuman Ganguli
Appellate Office
Bharti Airtel Limited




MY FORTH AND LAST MAIL:-

From: Upendra Nath
To: ceo@airtel.in
Cc: "Nodalofficer.NESA@in.airtel.com" ; "appellate@airtel.in" ; "nodalofficer@airtel.in" ; "ap@trai.gov.in" ; "secretary@trai.gov.in" ; "advmn@trai.gov.in" ; "advqos@trai.gov.in" ; "advmn@trai.gov.in" ; "airtelpresence@in.airtel.com" ; "121@in.airtel.com" <121@in.airtel.com>; "sachin.pilot@sansad.nic.in" ; "pilotoffice@gmail.com"
Sent: Wednesday, 21 December 2011 8:47 PM
Subject: Re: ACTIVATION OF SERVICES WITHOUT MY REQUEST


Dear CEO, Airtel

I want to give you a free advice to  close all of your appellate, nodal officer and customer care's offices with immediate effect because these people are not interested to solve customer,s problems and simply just enjoying fun there. Despite so many assurance by your nodal officer, appellate and customer care people,  my mob no. (8011218793) again get activated " cricket score pack" today on 21/12/11, that's six times in last one month , without my request and knowledge and this lead to deduction of my balance. Now after so many complains and spoke to you people, this one is enough for me. I  never seen such type of irritating and lying customer care people ( i don't want to take name here ). I dont have so may time to waste behind you people, so bye bye for forever because now I taken today my unique porting ID number and I am in process to get Vodaphone .

                                             
( Copy to TRAI - Please please you people don't let them fly high. )
( Copy to Mr. Sachin Pailot (Hon.'ble MOS (C&IT) (P) _ sachin.pilot@sansad.nic.in  &  pilotoffice@gmail.com
 

QUICK AND THREE POSITIVE REPLY BY  AIRTEL:


From: "airtelpresence@in.airtel.com"
To: upen1100@yahoo.com
Sent: Thursday, 22 December 2011 10:24 AM
Subject: ACTIVATION OF SERVICES WITHOUT MY REQUEST

This is to inform you that your concern has been noted and our team is working on a resolution. At the outset, we apologize for the inconvenience faced by you. We will get in touch with you for further details of your concern as the need arises.

Regards,
Rakesh Kumar
Airtel Presence (Airtel Customer Service Team)
Bharti Airtel Ltd

From: "appellate@airtel.in"
To: upen1100@yahoo.com
Sent: Thursday, 22 December 2011 3:55 PM
Subject: Re: ACTIVATION OF SERVICES WITHOUT MY REQUEST [|BAL|Qrc12112112012557128640|]
Dear Mr. Nath,
Warm greetings from all of us at airtel. This is in reference to the email received on 21 December 2011, expressing your concern regarding the deactivation of the value added services for your airtel mobile number 8011218793. 
We understand your concern and regret for the inconvenience caused to you. Assuring you the best of our services. 

Warm Regards
Shreya Rawal
Appellate Office
Bharti Airtel Limited
From: "Nodalofficer.NESA@in.airtel.com"
To: Upendra Nath
Sent: Thursday, 22 December 2011 4:11 PM
Subject: Re: ACTIVATION OF SERVICES WITHOUT MY REQUEST
Dear Sir
Thank you for writing to Airtel.
This is with reference to your mail regarding activation of Vas services without consent in your Airtel number   8011218793 . As per your request, we would like to inform you that Vas service has been deactivated from your Airtel number. We appreciate your valuable subscription with Airtel and it has always been our constant endeavor to serve you better. 
I truly hope that the above details adequately address your query.  Assuring you the best of our services

Warm Regards,
Nodal Officer
Assam & North East

मेरे इतने परेशान होने के बाद आखिरकर मेरी इस आखिरी ई-मेल  में जैसा की एयरटेल ने कहा,  मेरी समस्या समाप्त हो गयी. मगर तब तक बहुत  देर हो चुकी थी और मैं अपना सर और अधिक  न खपाने का निर्णय करते हुए एयरटेल से पोर्ट-आउट करके वोडाफोन में पोर्ट-इन की अप्लिकेशन दे चूका  था .

लेकिन मजे की बात ये रही की जिस दिन से ही मैंने पोर्ट - आउट का एयरटेल में मेसेज भेजा और पोर्टेबिलिटी नंबर मिला उसी समय से एयरटेल के कान खड़े हो गये और मुझे मनाने  का सिलसिला शुरू हो गया कि क्या बात हो गयी. जिस कस्टमर  केयर  के कानों कम्पलेन  करने पर  जूँ नहीं रेंगा करती थी वही अब मुझे पोर्ट- आउट करने से रोकने के लिए मनाने में जी जान से जुट गया. फिर फोन पर फोन रोज आने शुरू हो गये और मेरे ना मानने पर  फिर तरह तरह से प्रलोभन दिए जाने लगे .जैसे की एक साहब एक दिन बोले की अगर आप पोर्ट - आउट ना करे तो हम आपको Rs 50/- रिफंड कर देते है. मेरे  फिर भी मना करने के कुछ दिन बाद एक मोहतरमा जी सारी समस्या ध्यान से सुनी  और फिर मीठी आवाज में आफर की कि अगर आपको 100/- रूपये रिफंड कर दूं तो भी आप पोर्ट-आउट करना चाहेगें. फिर माथा ठनका और मैंने अपना  निर्णय सुनाया, " की अगर एयरटेल मुझे २ साल तक फ्री में बात कराएगा तो भी मैं पोर्ट-आउट करूँगा और आइंदा सबको बोल दीजियेगा की कोई फिर फ़ोन ना करे. " इसके बात कोई और फोन नहीं आया और  फिर इतनी मसक्कत  के बात आखिर 15 दिनों तक पेंडिंग रखने के बाद एयरटेल ने मेरा पोर्ट-आउट अप्रूव किया और हम अब वोडाफोन के मजे ले रहे है.........

आप लोगों से अनुरोध है की समय समय पर ये जरुर चेक करें की कहीं आपकी जानकारी के बिना कोई सर्विस तो एक्टिवेट नहीं हो गयी  ( एयरटेल में STOP लिखकर 121 पर सेंड करने से एक्टिव सर्विस का विकल्प आ जाता है बंद करने के लिए, इससे आपको पाता चल जायेगा की कौन सी सर्विस एक्टिवेट है). अगर आप भी किसी सर्विस प्रोवाईडर की सर्विस से ना खुश है तो देर ना कीजिये और ( PORT < mob no.> )लिखकर 1909 पर सेंड कर दें. यकीन नहीं मानेगे , पोर्ट -आउट का नंबर लेते ही आपकी समस्याओं को बड़े ध्यान से सुना जाने लगेगा और समस्या ख़त्म भी हो सकती है फिर आपकी मर्जी की पोर्ट आउट करें या नहीं. मगर हम तो इतने परेशान  हो चुके थे की एक ना सुनी और पोर्ट - आउट करके ही रहे. और ये बहुत आसान है.  पोर्ट -आउट  नंबर लेकर आप मोबाईल शॉप वाले को फोटो और आईडी प्रूफ के साथ सिर्फ 19/- जमा कर दें और आपका पोर्ट - आउट 15 से 20 दिनों में हो जायेगा. हाँ ,  मजे की बात ये की आपका मोबाईल एक सेकेंड भी बंद नहीं रहेगा जैसे ही एक सर्विस बंद होगी दूसरी उसी वक्त कम करने लगेगी.

Sunday, August 7, 2011

हिना रब्बानी की मुस्कराहट और उनके चेलों का कारनामा

कुछ समय पहले कश्मीर के पुंछ सेक्टर में आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए मेजर आकाश सिंह (courtesy:- Himalini Hindi Mgzn)
                                                                                                                                                    

पाकिस्तानी  आतंकवादियों  ने दो  भारतीय जवानों के सिर उनके धड़ से अलग कर दिए और अपने साथ में  सिर ले गए।इस नृशंस घटना से भारतीय सेना के अधिकारी भी हैरान हैं।'मेल टुडे' के मुताबिक घटना जुलाई के आखिरी हफ्ते की है जब कुपवाड़ा जिले में नियंत्रण रेखा के पास आतंकवादियों और भारतीय सेना के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस बात की आशंका जाहिर की जा रही है कि आतंकवादियों ने 20 कुमाऊं रेजिमेंट के दो जवानों की हत्या करके उनके सिर बतौर वॉर ट्रॉफी अपने साथ ले गए। लेकिन सेना के अधिकारी इस घटना की पुष्टि नहीं कर रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि इसका कश्मीर में आतंकवादियों से लोहा ले रहे दूसरे जवानों के मनोबल पर बुरा असर पड़ सकता है।पेट्रोलिंग पार्टी का हिस्सा रहा 19 राजपूत रेजिमेंट का एक अन्य जवान भी मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गया था। 
                    सेना के अधिकारी दबी जुबान में कह रहे हैं कि कुमाऊं रेजिमेंट के दो जवानों के सिर धड़ से अलग कर दिए गए थे। उनके धड़ को भी विकृत कर दिया गया था।  शहीद जवानों की पहचान हवलदार जयपाल सिंह अधिकारी और लांस नायक देवेंद्र सिंह के रूप में की गई है। हालांकि, गोली से शहीद हुए तीसरे जवान के बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है।जवानों का उनके पैतृक जिलों-पिथौरागढ़ और हल्द्वानी में अंतिम संस्कार कर दिया गया। 
                  अंतिम संस्कार के दौरान मौजूद उत्तराखंड पुलिस के अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की कि शव ऐसी हालत में थे कि उनके परिवार या रिश्तेदारों को देखने की इजाजत नहीं दी गई। इस पुलिस अधिकारी का कहना है कि सेना की तरफ से मिली सूचना में कहा गया है कि गोलीबारी के दौरान इनके सिर धड़ से अलग हो गए। वहीं, लांस नायक देवेंद्र सिंह के चाचा ने भी इस बात को माना कि परिवारवालों को शहीद का शव देखने नहीं दिया गया। पुलिस अधिकारी ने कहा कि आतंकवादियों ने रॉकेट से चलने वाले ग्रेनेड से जवानों पर हमला किया और उनके सिर उड़ा दिए गए। 
                  उधमपुर में मौजूद उत्तरी कमांड के आधिकारिक प्रवक्ता राजेश कालिया ने कहा कि नियंत्रण रेखा के पास मौजूद फरकियां गली में आतंकवादियों ने घुसपैठ करने की कोशिश की थी, जहां तीन आतंकवादी मारे गए थे। जवानों के सिर काटने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस मामले में ब्योरा उपलब्ध नहीं है।खबरों के मुताबिक  इस बात की पुष्टि की गई है कि यह घटना कुपवाडा़ सेक्टर में 30 जुलाई को शाम 4.40 बजे तब घटी जब सेना की एंबुश पार्टी तीन ओर से घिर गई
                 यह घटना तकरीबन उसी दौरान हुई जब पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार भारत के दौरे पर थीं और अपनी मुस्कराहटों व खुबसुरती से भारतीय मीडिया और नेताओ के दिलों में राज कर रहीं थी आपकी इस मुंह में राम बगल में छुड़ी  वाली अदा यह  देश  कब  समझेगा  मालूम नहीं मगर अपने वीर सपूतों को सलाम एक अपील मिडिया और मानव अधिकारों के हितों के लिए चिल पो..पो..करने वालों से की, कुछ दिन कहीं आप लोग पिकनिक मना आईये, यह देश ऐसी घटनाओं को बहुत जल्द  भूल जाने में माहिर  है