राज की एक बात कह गए वो छिपाने को मुझसे
"उपेन्द्र" लाख चाहकर भो वो जिसे वह छिपा न सके थे.
* * *
मत दिखाओ मुझे हसीं ख्वाब कोई अभी
" उपेन्द्र" बहुत बाकी है अभी उनके जुल्मों- सितम.
* * *
उन्हीं की जुल्फ थी उन्हीं का साया भी था
"उपेन्द्र " उन्हीं से हमने अपना चेहरा भी छुपाया था.
* * *
वो देती रहीं दस्तक बार बार मेरे दरवाजे पर
" उपेन्द्र" मै समझता रहा ये हवा के थपेड़े होंगे.
* * *
राज की एक बात थी वह पीछे पड़ गए बताने के लिए.
"उपेन्द्र" खामोश रहे हम जिसे वर्षों तक छिपाने के लिए.
"उपेन्द्र" लाख चाहकर भो वो जिसे वह छिपा न सके थे.
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मत दिखाओ मुझे हसीं ख्वाब कोई अभी
" उपेन्द्र" बहुत बाकी है अभी उनके जुल्मों- सितम.
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उन्हीं की जुल्फ थी उन्हीं का साया भी था
"उपेन्द्र " उन्हीं से हमने अपना चेहरा भी छुपाया था.
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वो देती रहीं दस्तक बार बार मेरे दरवाजे पर
" उपेन्द्र" मै समझता रहा ये हवा के थपेड़े होंगे.
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राज की एक बात थी वह पीछे पड़ गए बताने के लिए.
"उपेन्द्र" खामोश रहे हम जिसे वर्षों तक छिपाने के लिए.

