रोटी
रोटी सिर्फ रोटी नहीं
तपन सपनो की
मिठास प्यार की
कारीगरी हाथो की
उम्मीद ख्वाबो की
और स्वाद तानो का
सच कितना कुछ है
माँ तुम्हारी इस रोटी में।
रोटी
रोटी सिर्फ रोटी नहीं
तपन सपनो की
मिठास प्यार की
कारीगरी हाथो की
उम्मीद ख्वाबो की
और स्वाद तानो का
सच कितना कुछ है
माँ तुम्हारी इस रोटी में।
नींद
आने से पहले
आज फिर
गुजरी थी
शोर मचाते हुये
तेरी खामोशियाँ
अब किस किस से छिपाऊँ
कि सुबह होने को आयी
नींद का इन्तेजार करते करते।
1.
आज पुरे दिन
मन में रही
एक सुखद सी शान्ती
सुबह सुबह जो
उनकी यादो को
इरेजर से मिटा दिया था
हमेशा के लिए।।