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Sunday, May 27, 2012

कुछ क्षणिकायें

खंजर 
ये  खुदा 
एक गुजारिश  है तुमसे 
अगली बार खंजर 
उनके हाथों में 
थमाने से पहले 
न भूल जाना 
इस दिल को पत्थर  बनाना 

ताजमहल 
इतना  भी इतराना 
ठीक नहीं 
अपनी इस सुन्दरता पर 
न काटे  गए होते 
हाथ कारीगरों के 
तो आज हर घर 
इक ताजमहल रहा होता

मुस्कराहट एक गुनाह 
ये मुस्कराहट 
चली जाये तो 
सन्नाटा 
आ जाये तो 
गुनाह 
उन्हें गुनाह पसंद नहीं 
और हमें सन्नाटा 
इस तरह बढती रही 
हमारे गुनाहों की संख्या 

प्यार 
सिर्फ ढाई आखर 
उनके लिए 
जो शब्दों को देते है मोल 
जिया जाय तो कम है 
सात जन्म भी 
समझने  के लिए



                                                 कुछ तस्वीरें गाँव की

13 comments:

  1. bahut kam shabdo me bahut hee gahare bhaw ..wah....

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  2. बहुत ही सुंदरप्रस्तुति.............

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  3. सदियों का सत्य छिपा है इन क्षणिकाओं में।

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  4. बहुत ही सुंदर एवं सार्थक क्षणिकायें

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  5. सभी एक से बढ़कर एक....

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  6. बहुत ही सुन्दर ...
    सभी बेहतरीन है...

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  7. इन्हें कल की ब्लॉग बुलेटिन पर ले रहा हूं, पर अगर लौक न किया होता तो कुछ पंक्तियां कट पेस्ट कर देता।
    लाजवाब .. बस एक शब्द हैं इनके लिए।

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  8. गज़ब की क्षणिकाएँ ।

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  9. बहुत ही सुन्दर रचना

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  10. सच कहा है प्यार के लिए सात जन्म भी कम हैं ...

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" न पूछो कि मेरी मंजिल है कहाँ, अभी तो सफ़र का इरादा किया है
ना हारूँगा मै ये हौंसला उम्रभर,किसी से नहीं खुद से ये वादा किया है"
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आप का इस ब्लॉग में स्वागत है . आपके सुझावों और विचारों का मेरी इस छोटी सी दुनिया में तहे दिल से स्वागत है...