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Sunday, January 2, 2011

बचपन की तस्वीर

My son's Photo

सुबह से  शाम तक की 
व्यस्त भाग दौड़ 
बदल डालती है चेहरे की रंगत 
बोझिल मन थोड़ा सा भी 
अगर  पाता है फुरसत
तो घेर लेते है अनेकों  ख्यालात
ऐसे में जब कभी भी 
दिवार पर टंगी 
बचपन के तस्वीर की तरफ
जाती है  नज़र 
तो बरबस ही मन  खिंच  जाता है 
भोली भाली चिंतामुक्त 
हँसती तस्वीर की तरफ
और न चाहते हुए भी
फूट पड़ती है हंसी  
जिंदगी घूम फिर  कर
एक ही बिंदु पर केन्द्रित 
होती रहती है
कितना प्यारा था बचपना 
आने लगते है याद 
बचपन के पुराने दिन
और अन्दर ही अन्दर
यह जख्म उठता   है
कि क्यों  नहीं हम
बचपना  वापस पा लेते .. 

34 comments:

  1. बचपना कितना निरेमल है, रह रह कर उसी की तो याद ही आती है।

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  2. बचपन एकदम निश्छल होता है,दिखावा और दांव-पेच से परे होता है.इसीलिए प्यारा और बहुत प्यारा होता है. बड़े होने पर भी ये खूबियाँ जिनमें बरकरार रहती हैं वो लोग आज भी प्यारे और बहुत प्यारे लगते है. मगर अफ़सोस की ऐसे लोग न के बराबर हैं.

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  3. उपेंद्र बाबू!
    इसी से लोग बचपन और जवानी को बेवफा कहते हैं, जो छोड़ के जाएँ तो लौट कर नहीं आते... बुढ़ापा आखिरी साँस तक साथ निभाता है!!

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  4. वृद्धावस्था में आदमी शरीर और उम्र के अलावा,कई अर्थों में बच्चे जैसा ही होता है। शायद प्रकृति को भी अहसास रहा हो कि जीवनचक्र इस बालपन के बगैर पूरा नहीं होता!

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  5. बहुत सुंदर जी,चित्र भी बहुत प्यारा लगा, धन्यवाद

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  6. वाह ! आपका बेटा तो वाक़ई बहुत सुंदर है :)

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  7. @ काश हम बड़े भी यह मुस्कान, इनसे सीख लें

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  8. बहुत सुन्दर है आपका बेटा। उसे आशीर्वाद।

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  9. बचपन के दिन भी क्या दिन थे...
    बेटे को शुभाशीष.

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  10. सच कहा ... बचपन हमेशा याद आता है .. सकूं देता है .....
    आपको और आपके पूरे परिवार को नव वर्ष मंगलमय हो ..

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  11. To cherish those missing days, visit my Blog

    http://madhavrai.blogspot.com/

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  12. बचपन के दिन ऐसे ही होते हैं...निश्चिन्त,निफिक्र..मासूम से ....सबके मन में यह भाव कभी ना कभी आते ही हैं..काश वे दिन लौट आते.
    सुन्दर रचना

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  13. उपेन भाई, कविता और फोटो दोनो मस्‍त हैं। नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

    ---------
    मिल गया खुशियों का ठिकाना।

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  14. निश्छल,निर्मल भावों से औत प्रोत रचना.बहुत सुन्दर.

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  15. बचपन के दिन भी क्‍या दिन ...

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  16. .... बचपन हमेशा याद आता है

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  17. सही कहा आपने। एक गजल की लाईन अचानक याद आ गई।
    ये दौलत भी ले लो ये शोहरत भी ले लो
    भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी
    मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन
    वो कागज की कश्ती वो बारीश का पानी।

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  18. upendra ji
    bilkul sahi likha hai aapne ,ab to apne bachcho me hi apna beeta bachpan yaad aa jaata hai.
    ek geet ki ek lini jo mujhe bahut hi achhi lagti hai---
    tere roop me maine payaa
    bachpan apna dobaara--------
    bahut hi achhi post
    poonam

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  19. कविता और फोटो दोनो मस्‍त हैं। धन्यवाद|

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  20. बचपन जीवन का श्रेष्ठ समय होता है, न कोई चिंता न कोई तनाव।
    कहते हैं कि बुढ़ापे में व्यक्ति की मानसिकता एक बार फिर बच्चों जैसी हो जाती है।
    अच्छी कविता।
    आपके बेटे की तस्वीर मोहक लग रही है।

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  21. प्यारे से बेटे को शुभाशीष एवं आप सभी को नव वर्ष की मंगलकामनायें ।
    बचपन से सुन्दर समय दूसरा नहीं।

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  22. vaah kya bat hai

    kabhi yha bhi aaye
    www.deepti09sharma.blogspot.com

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  23. सच है बचपन के दिन जब तब याद आते हैं

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  24. आपका बेटा बहुत स्वीट है..
    सुन्दर प्रस्तुति..काश वो दिन वापस आ पाते..

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  25. बचपन को लेकर सुन्दर रचना और चित्र!
    --
    आपका ब्लॉग तो बहुत अच्छा-भला खुल रहा है!

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  26. बड़े होते जाते हम मुड मुड़ कर बचपन के पास पहुँच जाते हैं ...
    निर्मल मन की अच्छी कविता
    बेटा बहुत क्यूट है ...!

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  27. Bahut sundar baat kahi hai aapne ... kash ham phir se bachpan ko lout paate ... kash sabkuch pahle jaisa ho pata ... par kya karein samay kabhi peeche kee or nahi bahta ...

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  28. लेओ जी, एको गीत भी याद आ गया...........
    "बचपन के दिन भुला न देना......."

    सुंदर कविता.

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  29. खूब उपेन जी।

    हम सब कहीं न कहीं अपने बचपन को मिस करते हैं, लेकिन कमबख़्त वापस ही नहीं आता।

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  30. bahut achhi kriti hai bachpan ki

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