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Sunday, December 25, 2011

रविवार : बस आनंद ही आनंद

रविवार पर दो कवितायें:  एक ये जो 17 साल पहले की बाल कविता .......


(६ नवम्बर १९९४  को इलाहाबाद के " प्रयागराज टाईम्स " में प्रकाशित बाल कविता )

                  और एक ये जो आज की  (रविवार का एक मीठा एहसास )........
 रविवार : बस आनंद ही आनंद

रविवार !
यानि सुबह के मोबाईल के 
अलार्म की टिन- टिन से छुट्टी
और देर तक सुबह की 
मीठी नींद का आनंद 
बस आनंद ही आनंद

न सड़क पर
ट्रैफिक की चिंता
न आफिस पहुँचने की जल्दबाजी
न बास की खिंच - खिंच 
न सहयोगियों की चिख -चिख 
और  न फाईलों की टेंशन
वाह रे सुकून भरा आनंद      
बस आनंद ही आनंद

न फोन सिर  पर 
घनघना पा रहा 
न काम का बोझ दबा पा रहा 
सप्ताह के इस दिन 
बस चलती है हमारी मर्जी 
अजी आज के राजा है हम 
कहाँ मिलेगा ऐसा आनंद
बस आनंद ही आनंद

नहाने के बाद
छत पर गुनगुनी धुप का 
मीठा एहसास
गरमा गरम आलू पराठा
दे रहा नाश्ते का आनंद
बस आनंद ही आनंद

बच्चों का  स्कूल का विंटर कैम्प
उनकी अम्मा की किट्टी   
वाह रे सुकून भरा दिन 
बस इस रजाई में दुबककर 
ये बीत रहा दिन 
एक असीम शांति का आनंद
बस आनंद ही आनंद



ब्लॉग परिवार के सभी सदस्यों को क्रिसमस की हार्दिक बधाई और शुभकामनायें

11 comments:

  1. माफ़ कीजियेगा,कविता बेजान है.

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  2. @ राधारमण जी , कोई बात नहीं. शायद शनिवार की खुमारी निकली नहीं होगी.... अगली बार बेहतर कोशिश करूंगा. धन्यवाद.

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  3. रविवार किसे नहीं पसन्द नहीं है।

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  4. बढियां है !
    मगर अफ़सोस ये रविवार
    आता है हफ्ते में सिर्फ एक बार !

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  5. रविवार का तो आनंद ही कुछ और है..उसपर सर्दियों और क्रिसमस की हींग फिटकिरी लग गयी तो फिर कहना ही क्या!!

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  6. छुट्टी किसे पसंद नहीं. वाह रविवार.

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  7. रविवार को सब की छुट्टी होती है लेकिन जिसके नाम पर यह वार है उसकी यानी सूरज की छुट्टी नहीं होती।

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  8. अपनी जिंदगी में रविवार तो होता ही नहीं....
    बहरहाल, जिनके लिए होती है, उनके लिए मजे ही मजे....
    अच्‍छा प्रस्‍तुतिकरण।

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  9. ati samanya vishay par khoobsoorat rachna

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  10. मानसिक कुन्हासा लपेटे अच्छी रचना .दोनों अपनी अपनी जगह अव्वल .बधाई .

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  11. कोमल अहसासों का बहुत सुंदर चित्रण...बहुत सुंदर

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