वह अपने बचपन के दोस्त से काफी दिन बाद मिल रहा था . दोस्त लडकियाँ पटाने में माहिर था. उसने सोंचा क्यों न इस मुलाकात में अपने दोस्त से लडकियाँ पटाने का कुछ टिप्स लिया जाय. उसने अपने दोस्त से अपनी परेशानी बताई , " यार जिस कालेज में मैंने एडमिशन लिया है उसमें एक नई पटाखा माल आयी है. क्या लगती है यार , उसे पटाने का कुछ गुरुमंत्र हो तो बता ."
उसका दोस्त चटकारे ले - लेकर उसे एक एक टिप्स उसे बताता रहा. आखिर में उसका दोस्त जब बिदा हो रहा था तो उसने कहा, " लेकिन यार अगर लड़की पट गयी तो अकेले ही मत चटकर जाना. "
" अमां यार कैसी बात करते हो. तुम तो अपने यार हो और भला मुझे कौन सी उस लड़की से शादी करनी है. बस थोडा सा प्यार का झांसा देकर उसे पटना है और अपना काम निकलते ही फुर्र ..."
उसके दोस्त ने कहा , " यार उसका नाम पता तो कुछ बता . अगर उसका कोई फोटो तेरे पास हो तो दिखा, उसके चर्चे तेरे मुंह से सुनकर रहा नहीं जा रहा. "
उसने उसने जैसे ही अपने मोबाईल में लड़की की चुपके से खींची गयी लड़की की फोटो अपने दोस्त को दिखाई , उसका दोस्त लड़की का फोटो देखते ही आग बबूला हो गया और जोर से चीखा, " साले मै तेरा खून पी जाऊंगा . ये तो मेरी बहन का फोटो है. ख़बरदार जो इसकी तरफ देखा तो . "
उसके चेहरे की सारी रंगत गायब हो चुकी थी और पलभर में सन्नाटा पसरने लगा . दोनों दोस्त अपने अपने रास्ते चल दिए थे.
उसका दोस्त चटकारे ले - लेकर उसे एक एक टिप्स उसे बताता रहा. आखिर में उसका दोस्त जब बिदा हो रहा था तो उसने कहा, " लेकिन यार अगर लड़की पट गयी तो अकेले ही मत चटकर जाना. "
" अमां यार कैसी बात करते हो. तुम तो अपने यार हो और भला मुझे कौन सी उस लड़की से शादी करनी है. बस थोडा सा प्यार का झांसा देकर उसे पटना है और अपना काम निकलते ही फुर्र ..."
उसके दोस्त ने कहा , " यार उसका नाम पता तो कुछ बता . अगर उसका कोई फोटो तेरे पास हो तो दिखा, उसके चर्चे तेरे मुंह से सुनकर रहा नहीं जा रहा. "
उसने उसने जैसे ही अपने मोबाईल में लड़की की चुपके से खींची गयी लड़की की फोटो अपने दोस्त को दिखाई , उसका दोस्त लड़की का फोटो देखते ही आग बबूला हो गया और जोर से चीखा, " साले मै तेरा खून पी जाऊंगा . ये तो मेरी बहन का फोटो है. ख़बरदार जो इसकी तरफ देखा तो . "
उसके चेहरे की सारी रंगत गायब हो चुकी थी और पलभर में सन्नाटा पसरने लगा . दोनों दोस्त अपने अपने रास्ते चल दिए थे.
काश सब समझ पाते इस कहानी की सच्चाई के सन्देश को.
ReplyDeleteमेरी आँखों देखी कहानी है यह!! हकीकत!!
ReplyDeleteSunder sandesh
ReplyDeleteसच्चाई से रु-ब-रु कराती अच्छी लघुकथा
ReplyDeleteसबक देती हुई लघुकथा.
ReplyDeleteपरिवार और शिक्षा संस्थान-दोनों ही अब संस्कारों के केंद्र नहीं रह गए।
ReplyDeleteजब चोट खुद को लगती है तब दर्द महसूस होता है..बहुत सुंदर और सटीक लघु कथा..
ReplyDeleteआपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 29 -12 - 2011 को यहाँ भी है
ReplyDelete...नयी पुरानी हलचल में आज... जल कर ढहना कहाँ रुका है ?
ऐसा ही होता है।
ReplyDeletesach kadva hi hota hai...sashakt udaahran.
ReplyDeletesundar kahani... badhai.
ReplyDeleteवाह उपेन्द्र जी, एक तो बहुत दिन बात आये हैं, दूसरे फोटू भी नवीनतम लागाये हैं, बधाई हो.
ReplyDeleteतीसरे कटु सत्य लिखा है आपने.
कथा लघु किंतु संदेश विशाल.
ReplyDeleteआपको और आपके समस्त पारिवारिक जनो को नव-वर्ष २०१२ की ढेरों शुभकामनाये!
ReplyDeleteऐसा भी होता है...।
ReplyDeleteनववर्ष की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएँ
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