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Friday, November 30, 2012

अतिथि तुम कब जाओगे

सर्दी खांसी और जुखाम 
आजकल है ये मेरे मेहमान 
तीन दिनों से पैर टिकाये 
नहीं ले रहे जाने का नाम ।। 

तीनों आये है पूरी तयारी संग
कोई दिखता नहीं किसी से कम  
दिन रात  है इनका पहरा ऐसा 
बंद हुई खुशिओं की दुकान।।

शैतानी इनकी हरदम रहती जारी 
नहीं मानते ये किसी की बात 
जब डाक्टर आकर इनको धमकाता 
ये बन जाते बिलकुल अन्जान।। 

जब ये फरमाते है थोडा आराम 
हमें भी मिलती है थोड़ी राहत 
वरना इनकी जी-हुजूरी में 
फंसी हुई है अपनी जान।। 

बार- बार पूछता हूँ इनसे 
अतिथि तुम कब जाओगे 
ये मुस्कराकर देते है जबाब 
बहुत दिन बाद मिले हो जजमान

सर्दी खांसी और जुखाम 
आजकल है ये मेरे मेहमान ।।

15 comments:

  1. मेहमानों का ख्याल रखिए ... साथ साथ अपना भी !


    विश्व एड्स दिवस पर रखें याद जानकारी ही बचाव - ब्लॉग बुलेटिन आज की ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. wish you good luck . बहुत सुन्दर भावात्मक प्रस्तुति मेरी ब्लॉग पोस्ट-[कानूनी ज्ञान]- मीडिया को सुधरना होगा[कौशल] -आत्महत्या -परिजनों की हत्या

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  3. बहुत समस्या, कब जायें ये..

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  4. कल 02/12/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  5. बहुत बढ़ियाँ कविता
    :-)

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  6. आती सर्दी और जाती सर्दी दोनों ज्यादा परेशान करती हैं। ध्यान रखें अपना।

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  7. बार- बार पूछता हूँ इनसे
    अतिथि तुम कब जाओगे
    ये मुस्कराकर देते है जबाब
    बहुत दिन बाद मिले हो जजमान

    उम्दा.

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  8. सर्दी के साथ ये तीनों बिन बुलाये ही चले आते हैं ...
    ऐसे अतिथि जो जाने का नाम नहीं लेते ... बहुत खूब लिखा है ...

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  9. अब तो ये मेहमान चले गए होंगे।

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  10. कुछ लेते क्यों नहीं:)) बहुत खूब!

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  11. ऐसे महमानों के लिए अपना दरवाजा बंद रखना ही ठीक है!

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  12. बहुत ही सुंदर। मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा। धन्यवाद।

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