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Wednesday, June 9, 2010

गुस्सा

उसके पति उससे कह कर सोये थे कि सुबह - सुबह थोडा जल्दी जगा देना कल जल्दी ऑफिस जाना है । परन्तु सुबह उसकी भी नींद देर से खुली।
" रात भर क्या खाक छान रही थी जो सुबह जगा नहीं सकी " पतिदेव गुस्से में चीखे।
" रात में थोड़ा अच्छा सा सपना आ गया था ।"
" किस मजनूं के सपने देख रही थी , जरा में भी तो सुनूं। पति का गुस्सा बढता ही जा रहा था ।
" आज आप गुस्सा क्यों हो रहें हैं। सपने में हम तथा आप एक सुन्दर झील के किनारे.......।"
पति का गुस्सा कम होने लगा था तथा पत्नी ने राहत की सांस ली।

(प्रकाशित ०७ अप्रैल १९९९ हिन्दी देनीक " आज ")

1 comment:

  1. hahahaahahahaha

    aapne manbhavo ke badalne ke chitran
    bakhubi kiya he is laghu kathanak me

    badhai

    ReplyDelete

" न पूछो कि मेरी मंजिल है कहाँ, अभी तो सफ़र का इरादा किया है
ना हारूँगा मै ये हौंसला उम्रभर,किसी से नहीं खुद से ये वादा किया है"
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आप का इस ब्लॉग में स्वागत है . आपके सुझावों और विचारों का मेरी इस छोटी सी दुनिया में तहे दिल से स्वागत है...