Sunday, August 8, 2010

विश्व स्तनपान सप्ताह

हे पाश्चात्य सभ्यता में रमी
जीवनदाहिनी माओं
अपनी सुडौल शरीर की चिंता करने वाली
कॉन्वेंट स्कूल से निकली
आधुनिक नारीओं !

बड़े शर्म की बात है कि
आज मनाना पड़ रहा है
विश्व स्तनपान सप्ताह
और बताना पड़ रहा है
कि कितना जरूरी है
ये स्तनपान
बच्चे की सेहत के लिए ।

माना की सौंदर्य पर
पड़ सकता है विपरीत प्रभाव
मगर बच्चे की सेहत से भी तो
है एक मजाक
और नहीं हो जाती
कर्तव्यो की इतिश्री
सिर्फ जन्म दे देने से ही
संस्कार तो अभी पूरा है बाकी

कल को कोई बच्चा
कैसे ललकार लगाएगा कि
असल माँ का दूध पिया है तो रूक
या अगर कल को कोई दुश्मन
सीमा पर ललकार लगा बैठा
कि पिया है दूध अगर
अपनी माँ का
तो आ जा सामने
तब क्या तुम
अपने अर्जुन के
मन की दुबिधा दूर कर पाओगी
( चित्र गूगल साभार )

7 comments:

  1. dil ko chu lene wali rachna

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  2. उपेन्द्र आपका कहा सही है .....पर मै पूरी तरह से इस से सहमत नहीं हूँ
    मैंने अभी तक अपने इर्द गिर्द जितनी आज कल की मायों को देखा है वो सब अपने बच्चो को
    स्तनपान करवाती है .....मुझे तो आज तक भी ये नहीं पता था की स्तनपान सप्ताह भी होता है

    आपका प्रयास बहुत अच्छा है ......जो माँ स्तनपान से वंचित रखती है बच्चो को
    उनके लिए तो खास कर अच्छा लिखा है आपने

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  3. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

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  4. आप सभी लोंगों का अभार

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  5. हा मै भी अनु जी आप से सहमत हूं क्योंकि केवल
    कुछ ही लोगो के बारे में व बहुत थोडी सी ही इस प्रकार की प्रवृति पायी जाती है तथा उनहे ही जागृत करने के लिए यह सप्ताह हर साल अन्तर्राष्िटय स्तर पर मनाया जाता है

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" न पूछो कि मेरी मंजिल है कहाँ, अभी तो सफ़र का इरादा किया है
ना हारूँगा मै ये हौंसला उम्रभर,किसी से नहीं खुद से ये वादा किया है"
. (अज्ञात)
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