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Sunday, November 28, 2010

वे याद आये बहुत

 याद आयी बहुत हम रोये बहुत
 आंसुओं से ये पलके भिगोये बहुत ।।
 
बहुत चाहा की जी ले हम उनके बिना 
पर ख्यालात बनकर वे याद आये बहुत।।
                     




चित्र गूगल साभार
पल भर भी न गुजरा दो वक्त सही 
 राह देख - देख लम्हें गुजारे बहुत।

 कसक उठती रही आह बढती रही
ग़मों के बोंझ हम उठाये बहुत।।



कुछ भी न रहा जिंदगी हुई तन्हा 
                                              " उपेन्द्र "कदम दर कदम हम खोये बहुत।।

 




                

28 comments:

  1. कुछ भी न रहा जिंदगी हुई तन्हा
    "उपेन्द्र "कदम दर कदम हम खोये बहुत।।
    लाजमी है ऐसे हालत में यह सब कुछ होना ...दिल को छूने वाले भाव
    शुक्रिया

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  2. aaj kuchh udas hai aap achhi lagi gajal

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  3. kask uthti rahi aah badhati rahti.
    bhai sab kuch theek thaak hai.

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  4. @ भारतीय नागरिक जी

    @ सुनील कुमार जी

    @ पूरबिया जी

    बिलकुल सही हूँ . फिक्र करने के लिए शुक्रिया . ये सिर्फ गजल भर ही है. हाँ दिल से ग़ज़ल निकली तो दर्द का एहसास किसी कोने में कभी का जरूर रहा होगा या किसी के दर्द का सिर्फ एहसास भर भी .मेरे ब्लॉग पर अपना कीमती समय देने के लिए आभार.

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  5. @ केवल राम जी

    @ संगीता जी

    @ विजय जी

    ब्लॉग पर अपना कीमती समय देने के लिए हार्दिक आभार.

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  6. upendra ji, pyar ka matlab sirf pana hi nahi hota. kabhi kabhi sub kuch kho kar bhi hum bahut kuch pa lete hai. sunder rachna.

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  7. kuchh yaad dila de bhule ko
    likha apne kuchh itna gehra sa
    mai doob gayi aur chhalke aansun
    jab yaad aaya kisi ka pyaar wo thahra sa...

    nice upnedra ji.....my reply for u....

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  8. भावुक कर देने वाली प्रस्तुति।

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  9. य़ाद है ही ऐसी चीज जो रुला दे हंसा दे तनहा कर दे या मुलाकात की चाहत जगा दे । प्यार है तो याद भी आयेगी । भावभीनी रचना ।

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  10. मन अशांत हो उठा है मौन ही रहूंगी

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  11. उफ़ ये यादें. किसी का एक शेर याद आ रहा है:-

    याद में तेरी जहाँ को भूलता जाता हूँ मैं,
    भूलने वाले कभी तुझको भी याद आता हूँ मैं.

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  12. किस- किस तरह से वो याद आये बहुत ...
    यादों में घिरी सुन्दर कविता !

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  13. इंतज़ार के बारे में सुन्दर रचना !

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  14. पहली बार पढ़ रहा हूँ आपको और भविष्य में भी पढना चाहूँगा सो आपका फालोवर बन रहा हूँ ! शुभकामनायें

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  15. कई यादें होती ही हैं ऐसी जो बहुत सताती हैं, रुलाती हैं। भावुक प्रस्तुति। बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
    विचार::पूर्णता

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  16. बहुत उदास सी गज़ल है पर अच्छी है.

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  17. संवेदनशील .... अभिव्यक्ति.... यादें , आंसू और उदासी लिए.....अच्छी रचना ...

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  18. दिल को छूने वाले भाव
    ...........अच्छी रचना ...

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  19. बहुत सुन्दर प्रस्तुति ...

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  20. .

    जिंदगी में आने वाले मुसाफिर अपनी यादें छोड़ जाते हैं। याद आना तो स्वाभाविक है। स्मृतियाँ अगर मधुर हों तो स्मृतियों में डूबना अच्छा लगता है।

    .

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  21. कसक उठती रही आह बदती गई
    ग़मों के बोझ हमने उठाई बहुत........

    एक अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई स्वीकार करें....

    शब्दों और चित्रों का सुंदर सयोजन किया है अच्छा कलेवर बन पड़ा है.

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  22. सुन्दर रचना. इन पंक्तियों में जो दर्द भरा है वाही तो उसे सुन्दर बना रहा है.

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  23. Sunder rachna k liye badhai sweekar karen.
    http://amrendra-shukla.blogspot.com

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" न पूछो कि मेरी मंजिल है कहाँ, अभी तो सफ़र का इरादा किया है
ना हारूँगा मै ये हौंसला उम्रभर,किसी से नहीं खुद से ये वादा किया है"
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आप का इस ब्लॉग में स्वागत है . आपके सुझावों और विचारों का मेरी इस छोटी सी दुनिया में तहे दिल से स्वागत है...